“
मेरे बापू मुझे आपकी याद बहुत ही आती है।
कुछ घुँघला हुआ नहीं याद बहुत हीआती है।
जब आती आपकी चिट्ठी ख़ुशी से झूमती थी।
दूर रह भी समीपता का अहसास दिलाती थी।
मैंने आपको पत्र लिखा था पर भेज नहीं पाई।
भेजने से पहले बापू आपने अनन्त यात्रा पाई।
वैष्णो खत्री
”