STORYMIRROR

जितनी...

“ जितनी ख़ामोशी चेहरे पर लज्जाती है सूरत उतना काबिल अखबार हो जाती है इश्क़ पढ़ने वाले भी क्या किरदार होते हैं मुस्कुराहटों से खबर सरे-बाजार हो जाती है! ”

By इच्छित जी आर्य
 125