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जितनी...

जितनी ख़ामोशी चेहरे पर लज्जाती है सूरत उतना काबिल अखबार हो जाती है इश्क़ पढ़ने वाले भी क्या किरदार होते हैं मुस्कुराहटों से खबर सरे-बाजार हो जाती है!

By इच्छित जी आर्य
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