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दौलत जाने...

“ दौलत जाने से हाथों में जख्म गहरे पड़ गये अपने-अपने नकाबों से सब चेहरे बदल गये! सूनसान तो वैसे आज भी सारा मुहल्ला था गरीब देख मुझे सब साहूकार चेहरे में ढल गये! ”

By इच्छित जी आर्य
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