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इश्क़ की...

इश्क़ की इबादत हुई गम सब ही गुमनुमा हुए छुअन के अश्आर माहिर अहसास सब खुशनुमा हुए माहिर मुरादों से उनकी जिंदगी में हम दुआ हुए दीवानगी के साहिल पर मुहब्बत में हम खुदा हुए!

By इच्छित जी आर्य
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