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जितनी भी...

“ जितनी भी तक़लीफ़ मिली जीने से ही मिली मुझको आख़िर मर कर समझा नाहक़ ही बदनाम क़ज़ा थी!! - eMKay ”

By मोहनजीत कुकरेजा
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