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जीवन के...

जीवन के झरनों मे, याद्दो के रंगो मे, रंग ले सुनहरी, कलमो की अभिव्यक्तियों मे, क्या ये कलम रह ना पायी, मै यहाँ झिलमिलायी! ~ रुपेश कुमार

By Rupesh Kumar
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