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हस्त आमलक...

हस्त आमलक वत उन्हें,स्वर्ग और अपवर्ग. राष्ट्र याग में जो करे,प्राणों का उत्सर्ग. - रहें स्वस्थ सम्पन्न जो,कोई न हो प्रतिकूल. खेल मेल परिजन सहित,स्वर्ग गेह की धुल.

By अच्युतं केशवं
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