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हर वक़्त...

हर वक़्त …वक़्त की पाबंदी क्यू और मेरे फैसले में उनका हिस्सा क्यू चाहती हु जीना मनमौजी होके… फिर भी हर दफा ये लड़की होने की मोहर क्यू

By Pallavi kumbhar
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