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हर कोई...
हर कोई कुछ ना...
हर कोई कुछ...
“
हर कोई कुछ ना कुछ गम छुपाये फिरता हैं
होठो पे हंसी दिल से गम लगाये फिरता है
कोई क्या पूछे यहाँ हाल किसी का
हर कोई बस एक आग छुपाये फिरता है
”
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