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भोजन ऐसा...

“ भोजन ऐसा कीजिए,शोषण हिंसा हीन। शाकाहारी परिश्रमी, शुद्ध पवित्र अदीन। शुद्ध पवित्र अदीन,प्रथम प्रभु भोग लगाएं। शांतचित्त यज्ञान्न,प्रसादी रस ले खायें। रहे न भूखा दुखी, अतिथि या परिवारी जन। कृषकों का आभार,व्यक्त कर करिये भोजन। अच्युतमकेशवम एटा ”

By अच्युतं केशवं
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