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अनजान...
अनजान सफर अनजान...
अनजान सफर...
“
अनजान सफर अनजान डगर अनजान मुसाफिर,
जब चलते हैं साथ - साथ बन जाते हैं हमराह
उतरने लगते हैं इक-दूजे में अपने बनकर !
कृष्णा खत्री
”
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