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Bharat Buddhadev

Others

5.0  

Bharat Buddhadev

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यादें

यादें

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277


जहाँ कभी भी जाऊँ मेरे साथ साथ चलती

सांसें बड़ी जिद्दी है कभी अकेले नहीं चलती


उनका कतरा कतरा मुझे एहसास कराता है

घड़कता दिल, हर कदम उम्मीदें नहीं रूकती


पता नहीं कहाँ से ऊर्जा का ये समंदर आता है

लहरों की कैसी भंवर है जो कभी नहीं ठहरती


जबतक उम्र की ये अवधि मुक्कमल बाकी है

भरे बागबान में खुद की पहचान नहीं छुटती


तमन्नाओं की हर परछाइयों को झांक के देखा

ये परछाइयाँ जिस्म के मल्बे तले नहीं दबती


कहता "देव" कि अपनी सांसों को पहचान लो

जिस्म बिखरता है, उनकी यादें नहीं बिखरती



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