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Supragya Kaushik

Others


4.9  

Supragya Kaushik

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वक्त की सीख

वक्त की सीख

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सब बदल जाते हैं समय के साथ हमने सुना था            

समय बदल देंगे उनके साथ हमने ये सोचा था                

ना जान सके हम कि हमारे पास तो समय ही नहीं थाI

ना कोई गिले शिकवे, ना ही कोई नाराज़गी ,             

भुला दी हमने हर आवाज़ उस समय के आगाज़ की I


दिन ढले, महीने बीते, बदलते गए साल            

हर आहट के साथ बदले रिश्तों में इंसान I

वो इंसान ही क्या जो समय के साथ बदल जाए         

कहते थे लोग, लेकिन आज की दुनिया का

तो है एक ही उसूल

जो बदल जाता है वही जीता है                   

जो ना बदल पाए वो हो गए विलुप्तI


अब तो हम भी समझदार हो गए                   

समय के साथ विकास में भागीदार हो गए 

डर तो अब भी लगता है रंग बदलते लोगों से              

पर उस डर पे काबू कर हम भी प्रगतिवान हो गएI        



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