STORYMIRROR

Nayana-Arati Kanitkar

Others

4  

Nayana-Arati Kanitkar

Others

तुम और मैं

तुम और मैं

1 min
318

नहीं चाहती मैं कि

तुम भी चलो 

रेत में छपे मेरे पदचिन्हों पर 

उन पर तो चली हूँ मैं जन्मों से

अब उभरकर आई है 

जिनमें 

वे किरचें दरारों सी 

जो मेरे दिमाग से निकल 

मेरे हृदय से गुजरते 

फिर ठिठक गई है

पैरों के तलवे में जाकर 

जख्मों की तरह 

तुम , तुम तो 

पहले ही भर देना उन 

दरारों को

बालू से निकले उन

यूरेनियम के कणों से

जो शृंखला बनाकर

भर दे तुममें 

एक अथांग ऊर्जा

और गर वक्त आ जाए कभी

अनियंत्रित अवस्था का 

तो कर देना उसका 

विखंडन ...

विस्फोटक के रूप में।


Rate this content
Log in