स्वदेशी
स्वदेशी
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कुछ दो पलों की बातें ठहर जाती है
हर कदम का सोच बदलने को कहती है
जबानी में देश की सुरीली गीत रहती है
चांद तारे चमकने बहकने लगते हैं
सोना पानी एक काम बस नहीं रह जाता है
हर लम्हों में स्वदेश का नारा बसता है
परदेशी बनने की कोशिश ना करो
अपने तेल को अपनी दीपक से सींचो
करो काम इस महान देश के लिए
रचो इतिहास अपनी मिट्टी पर से
ना सोचो दूसरों के सपने अपनी का
देश को सपनों से भर लो पानी सा।
