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Sippy Khardia

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सर्दी /रठ ( मारवाड़ी भाषा)

सर्दी /रठ ( मारवाड़ी भाषा)

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सर्दी चूरू री सर्दी चूरू री।।

आ तो हाडा न धूजावे ।

दिन ओर रात्यूं जाड़ बजावे ।।

म्हारो काट काऴजो खावे।।

सर्दी चूरू री सर्दी चूरू री।।१।।

घणी जाडी धूंर आवे।

म्हाने दिन भर सोड़ सुवावे।।

ओ सूरजी बारै कोनी आवे।।

सर्दी चूरू री -सर्दी चूरू री ।।२।।

आ लसण सेती चटणी।

ईं न लोढै माथै बंटणी ।।

होसी सोरी रात कटणी ।।

सर्दी चूरू - सर्दी चूरू री।।३।।

खाओ बाजरिय रा रोट।

खाके हो वो लोट पोट।।

फेरूं नहीं धूजे होठ।।

सर्दी चूरू -सर्दी चूरू री।।४।।

ओढ़ो मोटी मोटी सोड़।

ऊनी घाबै की दे मसोड़।।

ईं को ओई मानो तोड़ ।।

सर्दी चूरू री - सर्दी चूरू री।।५।।

थे तो गर्मा गर्म खाओ।

गुदड़ा स्यूं बाहर मती जाओ।।

सोणै स्यूं मत सरमाओ ।।

सर्दी चूरू री - सर्दी चूरू री।।६।।

राखो सगऴा आपू आप ध्यान।

ओ कोरोना ओजूं काढै कान।।

*रिखो *रिजाई में बैठ्यो गावे गान।।

सर्दी चूरू री सर्दी चूरू री।।७।।



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