सोचिए जरूर
सोचिए जरूर
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क्या जो आपको जन्म देती है
जो आपको रांखी बांधती है
जो बेटी घर पर
आपका इंतजार बेसब्री से करती है
क्या वो आजाद है
क्या जन्म से लेकर मरण तक
इस समाज से युध्द नहीं लड़ती ये लड़कियां
क्या नहीं होती मायूसी
लोगों को उसके जन्म पर
जिसकी वजह से अस्तित्व
छाया है इस धरा का
क्या वो पहनेंगी क्या नहीं
कब घर से बाहर निकलेगी कब नहीं
पढ़ेगी या नहीं वो
क्या इन सब के फैसले
लेने की आजादी है उसे
क्या उनको अपवित्र कहकर
मंदिर से वंचित नहीं किया गया
क्या देश की खवातीनों हलाला,
तीन तलाक जैसी कुप्रथाओं को
नहीं सहना पड़ता
क्या उनकी आजादी को घूंघटों,
बुर्के हिजाबों में नहीं बांधा जाता
क्या उनको मोहब्बत करने की पाबंदी नहीं है
क्या पति को उससे रेप करने का
लाइसेंस नहीं है
सोजिएगा जरूर
