Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Pranjal Jain

Others

2  

Pranjal Jain

Others

संगीत

संगीत

1 min
284


जज़्बातों के समंदर में

लिया करता था

गहरे गहरे गोते।

सांस रुक जाती थी,

पर जान वहीं रहती थी।


मेरी ही गहराई,

जाने मुझे खोजती थी

या मैं उसे।


कितनी बातें करती थी,

और मैं, एकटक,

उसे सुनता रहता,

उसकी बातों से

अपने गीत

बुनता रहता।


आजकल,

छिछली डुबकियाँ लगाता हूँ,

न उससे मिलता हूँ,

न गीत सुन पाता हूँ।


सांस दो पल भी रुकती है

तो लगता है,

जान ले जाएगा कोई।


मैं सतह पर चौकन्ना हूँ,

मेरी गहराई डूब रही है,

उसका दिल रो रहा है।

मेरी ज़िन्दगी का संगीत,

कहीं खो रहा है।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Pranjal Jain