समझौता
समझौता
1 min
215
ये वक्त सिखाता गया और हम सीखते गये
समझौता करना हालात से, समझते गये
ताबीर बुनें कितने ना जाने कब से दिल में
जला के जज़्बात, राख बदन पें लगाते गये
हादसे इतने गहरे थे जख्म भरे जीने में
झुठे हंसी का नमक जख्मों पे से लगाते गये
हमनें खुद को नूर बनाके अंधेरे को हटाया
फ़लक तक पहुंचने की शिद्दत बनाते गये
इस फ़िजा की आदत सी हो गई है हमें
वाक़िफ़ हालात से वानिया जीना जीते गये।
