STORYMIRROR

गुरुदास प्रजापति 'राज'

Children Stories Romance Classics

4.0  

गुरुदास प्रजापति 'राज'

Children Stories Romance Classics

शीत की रात

शीत की रात

1 min
6


आई अब शीत की रात प्रिये,

       चल घरवा में भितराय चली।

 ऋतु मस्तानी पास बुलाके,

        सबकी ठठरी कंपाय चली।।


पाक लिए, पकवान लिए,

         सबको नाच नचाय अली।

अति सोहै श्वेतांबर ओढे़ धरा,

         कह 'राज' की शोभा निरालि कली।।


शृगाल की धुनि जब कान परै,

       मानो आयो ठंड बतावति है।

वह शीतल, मंद, सुगंध, समीर,

         सजोगिन को सरसावति है।।


जैकेट, कंबल और कोट, रजाई के,

        याद बहुत अब आवति है।

फुटपाथन पर हैं सोइ रहेन जो,

       गरीब जनों को सतावति है।।


शीतल ठंड से नर-नारि छके,

        मिली सांझ को आग तपावति है।

ठंड के मारे घुसे घर मा सब,

          खीर, पुलाव पकावति है।।


लइकन अम्मा बाबूजी के,

         बहुतै खूब छकावति हैं।

ठंड में कुछ प्रेम के रंग चढा़,

        नर-नारी के भेद न भावति है।।


रहि- रहि प्रेम दुलारन में,

           एक दूजे को खूब गलावति है।

मन "राज" के आज तो मोद भरे,

        अब गीत शीत के गावति है।।



गुरुदास प्रजापति "राज़"

मो0 9598524752


Rate this content
Log in