शीर्षक-मनमोहन कान्हा
शीर्षक-मनमोहन कान्हा
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जय माँ शारदे
जय श्रीकृष्णा
वृन्दावन के रास रचईया,
आयो मोहन नटवर कन्हैया!
अधर मुरली है है मीठी मुस्कान,
मन को मोहे हैं नन्दलाल!
आए मोहन वंशी बजईया,
हुई आनंदित ये सारी दुनिया!
ग्वाल बाल के मन हर्षाएँ,
गोपियों के हैं चीत चोराए!
बड़ा नटखट हैं ये कन्हैया,
गिरधर गोपाल तू बड़ा छलिया!
सबका प्यारा हैं माखनचोर,
दिल चुरा ले गए हैं चितचोर!
यशोदा मईया के प्राण आधारा,
नन्द बाबा के हैं राज दुलारा!
राधा रानी के प्रियतम प्यारा,
गोपियों के तू मनमोहन कान्हा!
मोर मुकुट पीताम्बरधारी,
मीरा के प्रियतम हैं बनवारी!
मेरी भी सुध बुद्ध ले गए कान्हा,
बड़ा प्यारा लागे हैं मनमोहना!
अतिमनभावन है रूप सलोना,
मुरली मनोहर हैं जग से निराला!
प्रिय है उनके मिश्री और माखन,
प्रेम के वश में हैं देखो ये योगेश्वर।।
