रिश्ता एक पहेली
रिश्ता एक पहेली
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रिश्ता
बहरूपिया
हो गया है
ना जाने
कौन-कौन सा
रूप बदलता है
रोज हीं अपना
लबादा
बदलता है
बुर्के में
छिपाकर चेहरा
रू-ब-रू होना
चाहता है
अपना वो
असली चेहरा
कभी भी
नहीं दिखाता है
विश्वास में लेकर
विश्वासघात
कर जाता है
रिश्ता खूब
हंसाता हैं
जब रिश्ता
हंसने लगता है
पागल कहकर
खिसक जाता हैं
अगले हीं पल
रुलाने लगता है
रिश्ता एक पहेली है।
