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Mahavir Uttranchali

Others

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Mahavir Uttranchali

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पतन

पतन

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मानव को अनेक चिन्तायें

चिन्ताओं के अनेक कारण

कारणों के नाना प्रकार

प्रकारों के विविध स्वरूप

स्वरूपों की असंख्य परिभाषायें

परिभाषाओं के महा शब्दजाल

शब्दजालों के घुमावदार अर्थ

प्रतिदिन अर्थों के होते अनर्थ

खण्ड-खण्ड खंडित विश्वास

मानो समग्र नैतिकता बनी परिहास

बुद्धिजीवी चिन्तित हैं

जीविकोपार्जन को लेकर!

क्या करेंगे जीवन मूल्यों को ढो कर?

व्यर्थ है घर में रखकर कलेश

क्या करेंगे मूल्यों के धर अवशेष?


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