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Sakshi Mishra

Others

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Sakshi Mishra

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प्रेम

प्रेम

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अब क्या करे जनाब आँखों की गुस्ताखी है

जो बातें ज़ुबान पर नहीं होती कमबख्त

आँखें बयां कर देती है


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