STORYMIRROR

Sudhirkumarpannalal Pratibha

Others

4  

Sudhirkumarpannalal Pratibha

Others

प्रेम और हरा रंग

प्रेम और हरा रंग

1 min
345

प्रेम

प्रकृति की

अनमोल

और अमूर्त

कृति है

तो नफरत

भी तो

प्रकृति की हीं

कृति है

प्रेम रंगहीन

होकर भी

सब रंग

समाहित

कर लेता है

प्रेम हरे रंग में

जीवंत हो उठता है

सावन के महीने में

चहुओर हरियाली

दिखती है

मन बाग - बाग

हो जाता हैं 

प्रेम हरियाली में

अभिभूत हो जाता है.


Rate this content
Log in