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fp _03🖤

Children Stories Thriller Others

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नज़रंदाज़

नज़रंदाज़

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जब मेरे पास कुछ शेष न बचा 

तो मैंने जो दांव खेला है, वो है " नज़रंदाज़ करना"।

मैंने अंत में हर उस चीज़ को नज़रंदाज़ किया है

जिसे मैंने अपनी ज़िंदगी में एहम हिस्सा बनाया है।

चाहे फिर वो मेरा कोई सपना हो , कोई व्यक्ति हो ,

कोई परेशानी हो , कोई हल हो , कोई खुशी हो , कोई गम हो ।

वो सारे क्षण और इंसान मेरे करीब तो रहता है

मगर मेरी उन भावनाओं को उनके प्रति व्यक्त करने से रोक देता है।

शायद ये अच्छा है , या शायद बुरा है।



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