Abhinaw Tripathi
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रोटी के ख़ातिर नया बसर ढूंढ करके
वो मुसाफिर चला गया डगर ढूंढ करके,
जिस गाँव से थी अब तक मोहब्बत उसे
वो उसको भुला गया शहर ढूंढ करके ।।
मुक्तक