mohhbat ki nishani
mohhbat ki nishani
1 min
0
मोहब्बत की निशानी कहती है जिसको,
इसमें बिछड़ने की कहानी नज़र आती है..!!
दुनिया खूबसूरत पर फ़िदा है जिसकी,
उसकी दीवार दर्द की दास्तां सुनाती है..!!
हर दीवार, हर पत्थर, हर कोने में जिसके,
किसी की अधूरी सी साँसें रोती हैं..!!
सफ़ेद संगमरमर की चादर ओढ़कर जो,
इमारत आज भी किसी का इंतज़ार करती है..!!
लोग फ़िदा हो गए उस दीवार पर जिसके,
उसकी ख़ामोशी सब कुछ कह जाती है..!!
इतनी हसीन बनावट थी जिसकी,
कि क़ब्र भी लोगों को जन्नत नज़र आती है..!!
