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sachin goel

Others

3  

sachin goel

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लोग थे

लोग थे

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जो चुनिंदा लोग थे,

सब जिन्दा लोग थे,


पैसा आया, उड़ गये,

जैसे परिंदा लोग थे,


मगर मेरी अर्थी पर,

सारे शर्मिंदा लोग थे,


मारने वाला देवता,

बाकी दरिंदा लोग थे


गाड़ी से रौंदे,"सचिन"

बेचारे, कारिंदा लोग थे



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