STORYMIRROR

Aman Mahto

Others

4  

Aman Mahto

Others

काश मैं तुझे बता पाता

काश मैं तुझे बता पाता

1 min
360

ज़िन्दगी के रास्ते यूं मुड़ते चले गए ,

तू छोड़ गयी या हम बिछड़ते चले गए,

तुझे मिला एक साथी तू संग उसके चलने लगी,

आहिस्ता आहिस्ता वक़्त की तरह बदलने लगीं,

तू थी बहती नदीं सी तुझे कहाँ रुक जाना था, 

पंख लेकर तुझे तो बस जहान में उड़ जाना था,

तू आई थी बहार सी तूफ़ान सी चली गयी,

मेरा दिल तो तेरा घर था ना क्यों मेहमान सी चली गयी,

तू रुकने कहा आई थी तुझे ही बदल जाना था,

इसमें वक़्त का कसूर क्या वक़्त महज तेरा बहाना था,

तेरे जीत की तालियों में मैं पीछे कहीं छुप जाता था,

तेरे हार में सबसे पहले मैं तुझे गले लगाता था,

क्या हार के बैठी है मुझको वो हार तुझे मैं दिखा पाता,

काश मैं तुझे बता पाता,

तू आदत थी मेरी, तू शिद्दत थी, मेरी तू जरूरत नहीं मोहब्बत थी मेरी ,

तुझसे ही शुरू तुझ पे ही खत्म हुई कहानी तेरी मेरी,

अपना अफसाना यहां अंत कहाँ हुआ,

शून्य से शुरू और अनंत का हुआ,

उस दिन के बाद मैं पीछे छूटता चला गया,

तारों की तरह धीरे धीरे टूटता चला गया,

अब ख़ामोशी पसंद हो गया हूँ मैं आवाज़ नहीं करता,

जो कोई पूछे तेरे बारे मैं जवाब नहीं करता,

हर रात तुझे याद कर दुनिया से तेरा ज़िक्र करता हूँ मैं,

जताता नहीं मगर अब भी तेरी फ़िक्र करता हूँ मैं,

इसके हर लफ्ज़ हर अल्फ़ाज़ तुझे सुना पाता काश मैं तुझे बता पाता !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन