जिंदगी
जिंदगी
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कल एक झलक जिंदगी को देखा
वो राहों पे गुनगुना रही थी
फिर ढूँढ़ा उसे इधर-उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी
हम दोनो क्यो खफा है एक दूसरे से
मैं उसे ओर वो मुझे समझा रही थी
मैने पूछ लिया क्यो इतना दर्द दिया तूने
वो हसीं ओर बोली मैं जिंदगी हूँ पगले
तुझे जीना सीखा रही थी।
