जिन्दगी
जिन्दगी
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जिंदगी में उतार चढ़ाव क्यों है
दरिया में इतना बहाव क्यों है
समंदर में क्यों है इतना पानी
आफताब में यूँ आग क्यों है
इस उम्र में ऐसा जुनून
ख़लिश इतनी बयाँ नहीं होती
रास्ते में गड़े मील के पत्थर
फिर भी मंज़िल में भटकाव क्यों है
आग है रक्त नहीं जो छू लेते हो
ज़हर है आब नहीं जो पी लेते हो
चाँद छूने की इतनी हसरत
तू इतना माहिर चर्खअंदाज क्यों है
(चर्खअंदाज :तीरंदाज )
