STORYMIRROR

Shubhendra Gupta

Others

2  

Shubhendra Gupta

Others

इतवार

इतवार

1 min
308

हर ज़रूरी काम को

नजरअंदाज़ कर

हर ग़ैर ज़रूरी काम पर,

हफ्ते भर से सोच रखा

एक दिन यूँ ही खर्च कर देता हूँ मैं।


नल की मरम्मत भी करवानी थी,

और राशन भी लाना था।

गैस की टंकी से गैस रिस रही थी,

और एक पुराने दोस्त से

मिलने भी जाना था।


मानो चाँद...जिस पर ज़िम्मेदारी है

चकोर की,भांजों की, महबूब की,

करवाचौथ की..

और हाँ.. ईद की भी।


जैसे इतवार..जो बना है,

बाल रंगने, नाखून काटने,

किताबों की अलमारी साफ करने,

और धूप सेंकने को।


हाँ याद आया,

इतवार ही तो था जिसको

हफ्ते भर से सोच रखा था,

सब ज़रूरी कामों के लिये।


आज दफ्तर जाते सोच रहा हूँ,

कैसे मैने कल का पूरा इतवार,

तुम्हारे पुराने ख़त पढ़ने में

ज़ाया कर दिया।


Rate this content
Log in