इक कहानी लिखी
इक कहानी लिखी
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कैसे कहूं के हमने ज़िन्दगी की एक नादानी लिखी..!
मचलते हुए अपने दिल की वो हमने परेशानी लिखी..!!
दूर होते उस रिश्ते की हमने जो इक कहानी लिखी..!
इक खतम होती रफ्ता रफ्ता सफर की जवानी लिखी...!!
नज़रों से मिली नज़र की क्या हमने दीवानी लिखी..!
इश्क़ में कैसे बदलते है लोगों की इक पेशानी लिखी..!!
आज भी जलते है दिये मज़ार-ए-दर दुआनी लिखी..!
अब सम्हलता नहीं ज़िगर हमने वो जुबानी लिखी..!!
याद आते हैं आज भी बताने को हमने निशानी लिखी..!
लिख कर जवाब देते हैं वो के हमने जंग-ए-जवानी लिखी..!!
