होली आई
होली आई
फागुन का आया है मास खुशियां कितनी संग लाया है
देखो ना तुम भी गुलाब ये मन कितना हर्षाया है...
खानी है गुंजियां जी भर अब बच्चों ने शोर मचाया है
धरती ने अपने तन पर बासंती रंग सजाया है...
खिल गई सरसों खेतों में प्रकृति पर यौवन आया है
बह रही सुवासित मंद मंद बयार दिल मिलने का मौसम आया है...
होली खेलेंगे सब मिलकर रंगों का अंबार लगाया है
हर गृहिणी ने अपना द्वार सुंदर रंगोली से सजाया है...
गोरी के गालों पर उसके साजन ने रंग लगाया है
पाकर प्रेमी का आलिंगन प्रेयसी का तन शरमाया है...
पिचकारी गुब्बारे लेकर नशा भी भांग चढ़ाया है
भूल आपसी द्वेष के भाव सब जन को गले लगाया है...
पुत गई रंग दीवारें सारी बरसाने का खुमार चढ़ आया है
जैसे खेले गोपी संग कान्हा वो नशा होली का छाया है...
पक गई फसलें चहका किसान होलिका दहन का अवसर आया है
सबके दिलों में स्नेह बरसाने होली का पर्व ये आया है..!.
