STORYMIRROR

Yoshita Sabharwal

Others

3  

Yoshita Sabharwal

Others

एक लड़की थी

एक लड़की थी

1 min
194

एक लड़की थी

जो खुद को खो रही थी

सबको हंसा कर

खुद रो रही थी

सबको प्यार सिखा कर

ख़ुद दूर हो रही थी

सबको साथ लाकर

खुद अकेली हो रही थी

सबको जोड़ कर

खुद बिखर रही थी

थक चुकी थी झूठ से

हार चुकी थी खुदा से

बदल दिया हालातों ने

सिखा दिया बाहर से मुस्कुराना जिंदगी ने

नहीं रही किसी से कोई भी आस

दूर कर देते हैं वो जो होते हैं सबसे खास

अकेला रहना सीख रही है

खुद को फिर से ढूंढ रही है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Yoshita Sabharwal