दिखावी रिश्ते
दिखावी रिश्ते
यह रिश्तो की डोर बहुत नाजुक होती है।
कहने को तो बहुत भावुक होती है।
यह हंसते हुए चेहरे बड़े अच्छे लगते हैं।
यह गले मिलते अपने बड़े सच्चे लगते हैं।
तभी एक हादसा सारी सच्चाई बयां करते है।
मदद के नाम पर सभी दुर्भागा करते हैं।
हवा का एक झोंका पेड़ को पकड़े पत्तों की मजबूती का एहसास कराते हैं।
आज मैंने रिश्तो का नया ठिकाना देख लिया।
दर्द को अपने जहन मैं दफन करना सीख लिया।
कमजोर रिश्तो को खुदा हाफिज कहना सीख लिया।
इस बदलते हुए जमाने में जीना सीख लिया।
दुश्मन से भी मधुर भाषा में बोलना सीख लिया।
कपटी लोगों के सामने दिखावी मुस्कुराना सीख लिया।
इस बदलते जमाने में जीना सीख लिया।
जीवन रूपी खिड़की से पेड़ की हरियाली को खुशियां बयां करना सीख लिया।
पेड़ के नीचे की डाबर की कंक्रीट को नजरअंदाज करना सीख लिया।
सुख दुख में सहज रहना सीख लिया।
मावठ तथा बरसात के मौसम को सुहाना समझना सीख लिया।
हर मौसम में चलना सीख लिया।
माया की इस दुनिया में इठलाना सीख लिया।
दिखावी रिश्ते को निभाना सीख लिया।
