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नीलम गुप्ता (नजरिया)

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नीलम गुप्ता (नजरिया)

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देर रात

देर रात

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जब तुम देर रात तक नहीं आते हो

अनहोनी की आकांक्षा से मेरा दिल घबराता है

वो तो भला हो इस मोबाइल का

मिला इस पर तुम्हारा फोन करती बातें

जब यह कहीं दिल जा कर, राहत सुकून पाता है


आज की इस भाग दौड़ में, समय किसी के पास नहीं है

लेकिन आज का इंसान एक दूसरे से फोन पर अधिक बतलाता है

पहले दूर रहने पर, सब अनजान से हो जाते थे

अब वीडियो कॉल कर अपनो को, देख राहत पाता है


कहते हैं इसकी लत बुरी, लेकिन काम यहीं आता है

पहले अकेले बैठे रहते थे, अब इसमें दिल लगा, दिमागी सुकून पाता है

आस पड़ोस की चुगली न कोई, न निंदा किसी की करते हैं

लगाकर मूवी रहते मस्त, देर रात तक लुत्फ उठाते हैं।



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