डर था तो !
डर था तो !
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पहचान खोने का डर था तो
खुद को अपना बना लिया
चहेरा बदलने का डर था
कोई ओर मोहरा लगा लिया
मौसम बदलने का डर था तो
तुफान को दोस्त बना लिया
जिंदगी बदलने का डर था तो
मृत्यु को मेहमान बना लिया
यूं नरक में जाने का डर था तो
वापस आने का मन बना लिया
यहाँ का स्वर्ग खोने का डर था तो
अपने मन को मंदिर बना लिया
कहता "देव" मत रखो कोई डर तो
अपने ही अंदर ईश्वर समा लिया
