बसन्त
बसन्त
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ऋतुराज बसन्त के आगमन में खिल उठा संसार
धरा ने सरसों के सुगन्धित पीले पुष्पों से किया श्रृंगार
मन्द मन्द बयार के झोंकों ने किया प्रेम का प्रसार
कोयल ने कूहूक कूहूक कर खुशी का किया इज़हार
विद्या की देवी सरस्वती के स्वागत में सज़ा घर द्वार
आम्र बौरों, लहलहाती फसलों,कमल पुष्पों ने किया सत्कार
ऋतुओं की ऋतु, ऋतुराज बसंत का ह्रदय से आभार।
