बेटी नहीं है बोझ
बेटी नहीं है बोझ
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बेटी है एक खरा सोना,
इसे न आप कभी खोना।
खोओगे तो पछताओगे,
बाद में फिर मत रोना।
बेटी होगी हर एक घर में,
महके का हर कोना।
फूल खिलेंगे सब महकेंगे,
ऐसी खुशियां तुम भी संजोना।
बेटी है खुशियों का खजाना,
उसको हमेशा संवार कर रखना।
उसके हर सपने को पूरा करना,
यह हो जीवन का सपना।
