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kavi manoj kumar yadav

Others


5.0  

kavi manoj kumar yadav

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बारिश

बारिश

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मेघ से जब नीर बरसे।

तब मधुप कुंतल को तरसे।


ढूंढता किसलय कोई तब।

चूस कर जिसको वो हर्षे।


पा गया गर गात कंचन।

तब मधुप निकले न घर से।


मिल गयी काया जो शोभित।

तब बिता देता है अरसे।


अब लगे ज्यों सीखता है।

वो मिलन के गीत नर से।



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