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अम्मा

अम्मा

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हम सबके बीच सेतुबंध, रिश्तों की अलगनी अम्मा |
पौ फटने से देर रात, चलती-फिरती नटनी अम्मा |

स्नेह, करुणा, ममता में हम उनसे बौने ही रह गए
हम सबों के कद मिलाकर ऊंची है कई गुनी अम्मा |
 
पुरानी डायरी में पढ़ कर बाबूजी की यह जाना
थी आलूचाप सी चटपटी, अमचुर की चटनी अम्मा |
 
गम की हलकी छाया भी कभी नहीं बच पाई उनसे
इतनी गूढ़ निगाहें है जैसे हों त्रिलोचनी अम्मा |

उनके है रूप अनेक, देवी, दुर्गा और टेरेसा
कभी अनुसुया, यशोदा तो कभी सावित्री बनी अम्मा |
 
जब-जब कठिन समय ने दरवाजे पर दस्तक देनी चाही
घर के किवाड़ सभी लगाकर, बन गई चटकनी अम्मा 

तुलसी के दोहों सी, मीरा के भजनों सी मधुर-मधुर
हमारी जीवन-कविता मे, अक्षर, स्वर, वर्तनी अम्मा |


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