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Kavita Sharma

Others

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आसान नहीं ये ज़िंदगी का सफ़र

आसान नहीं ये ज़िंदगी का सफ़र

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घर से निकले तब पता चला,
अपनों के दूर होने का दर्द।
ज़रा आगे बढ़े तब पता चला,
बिछड़ जाने का दर्द।
थोड़ा सफ़ल हुऐ तब पता चला,
दोस्ती छुट जाने का दर्द।
जब शिखर पर पहुँचे तब पता चला,
अकेले खड़े होने का दर्द।
जब सब पा लिया तब पता चला,
जुनून खोने का दर्द।
ज़िंदगी को पलट कर देखा तब पता चला,
दूरियों से नज़दीक होने का दर्द।
जहाँ था कभी डर ख़ुद मेंं खो जाने का,
और आज है ख़ुद को खो जाने का दर्द ।।

© कविता शर्मा


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