कविता
तू रिश्ता बनाती रही रेत पर मैं तेरा नाम पत्थर पे बनाता रहा। तू रिश्ता बनाती रही रेत पर मैं तेरा नाम पत्थर पे बनाता रहा।
मैं किस लालच में दूर हूं अब तक क्यों मां की ममता जान ना पाया हूं मैं किस लालच में दूर हूं अब तक क्यों मां की ममता जान ना पाया हूं
ममता की ममता को भी तोड़ा तूने जिसे गौ माता कहते उसे भी नहीं छोड़ा तूने ममता की ममता को भी तोड़ा तूने जिसे गौ माता कहते उसे भी नहीं छोड़ा तूने
मै तकलीफ मेे जी रहा था तकलीफ मुझे अच्छी लगी। मै तकलीफ मेे जी रहा था तकलीफ मुझे अच्छी लगी।