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Arohi Inayat

Zubaan-E-Dil

  Literary Captain

फ़र्क नहीं पड़ता मुझे अब

Inspirational

फ़र्क नहीं पड़ता मुझे अब... किसी के रूठ जाने से...

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मैंने तो सोचा था भूला दिया

Romance

बांध कर जो रखा था सब्र मैने इतने दिनो से आज फिर उन ज़ख्मो ने मुझे झुका दिया।।।।।।

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कुछ ज़ख्म

Abstract

दिल का दर्द दिल मे दबा दबा सा है.. वो ज़ख्म अभी भी हरा हरा सा है.. मै आज भी तुझसे बात करने को तरस...

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लफ़्ज़ों में वो बयान...

Tragedy

तुने एक नज़र भी मुड़ कर देखा नही..

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