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फरेबी तो थे हम जिस्मानी प्यार के, मगर तुझ से रूहानी इश्क है तेरी अदावत में। फरेबी तो थे हम जिस्मानी प्यार के, मगर तुझ से रूहानी इश्क है तेरी अदावत में।
इंतजार तो हर कोई करता है ना किसी के प्यार में इंतजार तो हर कोई करता है ना किसी के प्यार में
क्या कहे जमाने को अब तो हम वो हमे भी अब तो फिर से चाहने लगे। क्या कहे जमाने को अब तो हम वो हमे भी अब तो फिर से चाहने लगे।
ना फिक्र की, ना मलाल (रंजीदा, दुःख) किया , मिलकर भरी महफिल में उसने मुझे ना फिक्र की, ना मलाल (रंजीदा, दुःख) किया , मिलकर भरी महफिल में उसने मुझे
एक अजनबी से मुसाफिर की तरह। एक अजनबी से मुसाफिर की तरह।
ना गिला है कोई, ना वफा है कोई, ना बेवफा है कोई। ना गिला है कोई, ना वफा है कोई, ना बेवफा है कोई।
ना दिन हुआ ना शाम ढली मसलसल एक सहमी सी रात थी। ना दिन हुआ ना शाम ढली मसलसल एक सहमी सी रात थी।
मैं शायद मिलुँगी तुझे उस अनजान राह में एक अजनबी से मुसाफिर की तरह। मैं शायद मिलुँगी तुझे उस अनजान राह में एक अजनबी से मुसाफिर की तरह।
जिसमें ना होगी कोई भी रीत होगी हर तरफ मेरी ही जीत। जिसमें ना होगी कोई भी रीत होगी हर तरफ मेरी ही जीत।
ज़हर रख कर कहां जाओगे आखिर तो ख़ाक बनकर मिटी मे मिल जाओगे! ज़हर रख कर कहां जाओगे आखिर तो ख़ाक बनकर मिटी मे मिल जाओगे!