सोच
सोच
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"अरे बेटा, कहां जा रहे हो ? मां ने बाहर जाते हुए बेटे से पूछा? बस माँ इधर ही अपने दोस्तों के साथ....
'चलो ठीक है, जल्दी आ जाना....बेटा ' शाम तक 'बोलता हुआ बाहर निकल गया। मां अपनी बेटी के पास जाकर बैठ गयी जो पढ़ रही थी....
कुछ देर बाद बेटी ने कहा, 'मां, मैं अपनी सहेली के यहां जा आऊं.. मैंने उस से कुछ नोट्स लेने हैं '...
माँ ने पूछा...' उसका घर कहां है '?
'10 मिनट का रास्ता है '
मां बोली.. रहने दे, कोई जरूरत नहीं जाने की, इतनी दूर तू कहां जाएगी पैदल चलकर ? अपनी सहेली को फोन कर बोल दे, वह तुझे आकर कॉपी दे जाएगी....!!
बेटी कुछ नहीं बोली... लेकिन उसके मन में तूफान सा उठ गया था.. मां की सोच को लेकर जो उसके भाई के लिए अलग है, बेटी के लिए अलग है और बेटी की सहेली के लिए अलग .....
