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क़त्ल नही होने दूंगा
क़त्ल नही होने दूंगा
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© Lucky Nimesh

Thriller

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डबल बैड पर आड़ी  तिरछी अवस्था में पड़ी वह लड़की  दुनिया जहान से बेखबर सोयी पड़ी थी। काली जिन्स और लाल टॅाप मे वह बला की हसीन लग रही थी ,बैड पर उल्टी अवस्था  मे उसका चेहरा चमक रहा था और बता रहा था कि वह बेहद हसीन थी ,बेहद खूबसूरत। एक हांथ उसका आधा बैड से लटक रहा था जिसकी वजह से उसके हाथ में पहना बेशकीमती ब्रेसलेट ,जो कि सोने का था , लटक रहा था। ब्रेसलेट काफी चौड़ा था , उस पर लिखा था अग्रेंजी में 'R' जो सामने वाले को बरबस ही अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था।  तभी बैड के पीछे खिड़की  पर आहट हुई बहुत धीरे से ,फिर शान्ति छा गई ,लड़की पर कोई प्रतिक्रिया नही हुई वो अब भी बेखबर सी सोई हुई थी। कमरे में नाइट बल्ब की रोशनी छाई हुई थी ,खिड़की  पर पुन: कुछ सरसराहट हुई ,खिड़की  के शीशे के अन्दर से एक हाथ अन्दर आया और उसने खिड़की की चिटकनी धीरे से खोल दी, हल्की सी आवाज जरूर हुई मगर लड़की पर कोई असर नही ,वह अब भी ज्यो की त्यो सोई हुई थी।  खिड़की  को खोलकर नकाबपोश धीरे से कमरे के अन्दर कूद गया और कुछ सैकिन्ड के लिये उसी अवस्था में रहा , ओवरकोट पहने नकाबपोश सिर पर फैल्ट हैट पहने हुवे था और अपना चहरा भी नकाब से ढक रखा था, कुल मिलाकर किसी भी तरह से कोई उसे पहचान नही सकता था। वह सर से पाँव तक भीगा हुआ था , पानी टपक कर फर्श पर बिखर रहा था। धीरे -धीरे वह लड़की  की तरफ बढ़ने लगा। एक हाथ उसका ओवरकोट की जेब में था, वह लड़की  के पास पहुंचा , जब उसका हांथ जेब से बाहर आया तो उसमे रिवाल्वर चमक रहा था,उसने लड़की का कधां पकड़कर पलट दिया। लड़की ने कुनमुनाकर आंखें  खोल दी और बस उसकी आँखे फटी की फटी रह गई ,नींद पूरी  तरह से उड़ चुकी थी आख़िर रिवाल्वर उसी को घूर रहा था ,सेकण्ड के सौवे हिस्से में उसके तमाम रोम -रोम ने पसीना उगलना शुरु कर दिया, वह चीखना चाह रही थी मगर खौफ से वह चीख नही पा रही थी। नकाबपोश बड़े आराम से उसकी हालत का मज़ा ले रहा था। कहा उसने भी कुछ नही , "कौ...न.. हो ..तुम..? "लड़की की लड़खड़ाती आवाज़  मुश्किल से मुहँ से निकली , नकाबपोश ने फिर भी कुछ नही कहा, "बताते क्यों नही ? यहाँ कैसे आये ? मुझे क्यो मारना चाहते हो?" क्या बिगाड़ा है मैने तुम्हारा? " डर की वजह से थर थर काँपती उसने एक ही साँस में सारे सवाल पूछँ डाले। मगर पटठे पर कोई असर नही कुछ नही बोला , वह शायद बोलना ही नही चाहता था , उसका रिवाल्वर वाला हाथ उठा , ट्रिगर पर उगंलिया सख्त होने लगी, लड़की  समझ गई कि अब वह मरने वाली है उसने बैड से छलागं लगाने कि कोशिश करी ,धायँ... गोली लड़की के दिल वाली जगह जा लगी ,लड़की का लहुलुहान जिस्म नकाबपोश के आगे जा गिरा , "न..ही...." एक चीख राजन के मुहँ से निकली और वह बैड पर बैठा गहरी सासँ ले रहा था। सर्दी के मौसम में भी उसका शरीर पसीने से तर ब तर था, हैरत से उसकी आँखे फटी की फटी  रह गई ,काफी देर तक वह उसी अवस्था में बैठा रहा, बहुत देर बाद उसे होश आया टैबल लैम्प आॅन किया  ,सुबह के चार बज रहे थे, गला सूखा हुआ था ,जैसे काटें उगे हो, सांसे धौकनी की तरह चल रही थी। उसने पानी पीया कुछ राहत सी हुई मगर दिमाग अब भी सुन्न था, कुछ समझ नही आ रहा था कि यह सपना है या हकीकत , वो गहरी सोच में था फिर उसे रात भर नींद नही आई वह बस वैसे ही लेटा रहा। 

राजन सुबह का नाश्ता कर रहा था जब उसका मोबाईल बज उठा , उसने स्क्रीन पर नजर डाली चहरे पर मुस्कान छा गई दूसरी तरफ वीणा थी , वीणा मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती थी। उसके परिवार में केवल वो उसकी माँ शारदा और पापा दया शकंर ही थे, दयाशकंर की दिल्ली में छोटी सी कपड़ों की दुकान थी , कुल मिलाकर गुजारा हो जाता था।  जबकि राजन यूपी से था और वह दिल्ली जामिया नगर थाने में इंस्पेक्टर के पद पर था।  यहाँ वह अपने छोटे से फ्लैट में रहता था , बेहद इमानदार कर्मठ व तेजतरा्र पुलसिया था।  वीणा व राजन की मुलाकात वीणा के काॅलेज फंक्शन में हुई थी और तभी से दोनो प्यार करने लगे थे। यह बात सभी को मालूम थी और किसी को एतराज भी नही था ,सो उनका मिलना जुलना आम बात थी। आज भी उनका लचं का प्रोग्राम था सो वीणा का फोन आ गया था  "हैलो" राजन ने प्यार से कहा ,कहाँ हो राजन,वीणा की मधुर आवाज उसके कानो में पड़ी,बस नाश्ता कर रहा हूँ तुम कैसी हो, ठीक हूँ तुम सुनाओ,बढ़िया ,राजन ने उसे सपने के बारे में कुछ नही बताया क्योकि वीणा घबरा जाती ,तो आज लचं के लिये आ रहे हो न? हाँ बिल्कुल आऊँगा ,बताओ कहाँ आना है? वहीं तिलक रोड पर जो रेस्टूरेंट है महाराजा रेस्टुरेंट वहीं पर मिलते है ,ठीक एक बजे ,ठीक है फिलहाल मैं थाने जा रहा हूँ ,मैं वहीं आ जाउगां ओके,ओके कहकर राजन ने फोन डिस्कनेक्ट किया और नाश्ते मे बिजी हो गया। 

नाश्ते के बाद राजन ने पुलिस जीप निकाली और जामिया नगर के अपने थाने की तरफ दौड़ा दी ,राजन का दिमाग अब भी उसी सपने पर अटका हुआ था , न जाने क्यो उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे सब कुछ उसके सामने हुआ हो। कई दिनो से वह जब भी सोता वही सपना बार-बार उसकी आँखो में समा जाता , हलांकी वह जानता था कि सपने झूठे होते है मगर दिल था कि मानने को तैयार नही था, यही सब सोचते हुए वह थाने में पहुचँ गया। कम्पाउण्ड में पहुचँ कर जीप पार्क की और अपने ऑफिस की तरफ चल दिया। थाने में वही रोजमर्रा का काम जारी था , वह अपने आॅफिस में पहुचाँ और घण्टी बजा दी, तुरन्त एक हवलदार अन्दर आया और सैल्यूट करके खड़ा हो गया। राजन ने सैल्यूट का जवाब दिया और हवलदार से रवि को अन्दर भेजने को कहा और काॅफी के लिये भी, हवलदार चला गया। राजन सिगरेट जलाकर उसी सपने पर विचार करने लगा , तभी रवि अन्दर आया ,सर आपने बुलाया रवि सैल्यूट देकर बोला ,हाँ बैठो,रवि राजन से जूनियर था। उसे ज्वाईन करे ज्यादा टाइम नही हुआ था , मगर वो ईमानदार  व कर्मठ था। रवि और राजन की उम्र मे ज्यादा फर्क नहीं था , इसलिये वे दोस्तों  की तरह रहते थे। रवि सामने कुर्सी पर बैठ गया तभी हवलदार काॅफी के मग रख गया , राजन कुछ देर तक यूँही सोचता रहा , रवि देख रहा था कि सर आज कुछ परेशान लग रहे हैं , चिन्ता राजन के चेहरे पर साफ चमक रही थी जबकि आजकल कोई ऐसा केस नही था जो परेशान करता।  जब काफी देर तक राजन कुछ नही बोला तो रवि को कहना पड़ा " सर क्या बात है आप परेशान लग रहे हैं " राजन जैसे नींद से जागा , काॅफी लो रवि,कहते हुए खुद भी मग उठा लिया।  रवि ने भी ऐसा ही किया , राजन ने रवि को सपने के बारे में बताया कि किस तरह वही सपना उसे बार-बार आ रहा है और वह सपने की वजह से परेशान है, रवि ने सारी बात सुनी और मुस्कुराकर बोला, सर आप ख़ामख़ा परेशान हो रहे हैं , सपने तो पता नही क्या-क्या आते हैं मगर इनका कोई मतलब नही होता,मै जानता हूँ  रवि मगर पता नही दिल नही मान रहा , सर क्या आपने उस सपने वाली लड़की को देखा है। नही,कभी नही। बस तो आप क्यो परेशान होते हैं ? यह सब वहम है,आप रेस्ट  कीजिए,हूं। ठीक कह रहे हो शायद ज्यादा सोचने से उल्टे सीधे ख्वाब आ रहे है।राजन ने कहा ठीक है,रवि मै एक आधा घंटे मे निकलूंगा , संभाल लेना ,वीणा के साथ लंच पर जाना है।रवि वीणा और राजन के सम्बंध से वाकिफ़ था सो उसने कुछ नही कहा। तुम जा सकते हो रवि,जी  सर सल्यूट देकर वहां से चला गया। राजन भी सारी सोचों को झटक कर काम पर लग गया। साढ़े  बारह बज चुके थे । राजन ने अपनी जीप  निकाली और तिलक रोड पर डाल दी।तभी वीणा का फोन आ गया,उसने जीप की स्पीड कम करके फोन कान से लगा लिया" हे! कहां हो राजन ?वीणा ने कहा "बस पहुंचने वाला हूं ,रास्ते में हूं, ठीक है, आ जाओ  मैं इंतजार कर रही हूं।और मोबाइल डिसकनेक्ट कर दिया, राजन रेस्टोरेंट पार्किग में जीप खड़ी  करके अंदर गया,एक टेबल पर वीणा बैठी दिखाई दी , वो वही पर आ गया। लंच का ऑर्डर देकर वो अपलक वीणा को देखने लगा,वीणा शर्मा गयी, क्या देख रहे हो?वीणा ने कहा ,कुछ नही तुम बहुत हसीन लग रही हो। राजन ने प्यार से कहा तो वीणा शर्मा गयी,लंच करते हुए वीणा बोली "राजन एक बात कहूं" हां बोलो , राजन ने कहा। मुझे गुड़गांव  जाना है मेरी सहेली की शादी है मै तुम्हे छोड़कर  जाना तो  नही चाहती थी मगर वो तो बहुत जिद कर रही है,वीणा ने थोड़ी  मायूसी से कहा,कोई बात नही तीन दिन की ही तो बात है चली जाना मगर कोशिश करना जलदी आने की " राजन ने प्यार से कहा  " हूं मै कोशिश करुगी। "फिर इधर उधर की बातो के बाद वीणा घर के लिए निकल गई और राजन थाने की तरफ निकल गया । 

 टेक्सी से जो लड़की उतरी वो यकीनन बला की खूबसूरत थी । किमती जिन्स और टॉप मे वो वाकई किसी अमीर घराने की लग रही थी आँखों पर चश्मे लगाये वो बेहद मोडर्न लग रही थी हैण्ड बैग उठाये कुछ दुर ही चली थी कि कोई उससे टकराया वह गिरते-गिरते बची जब तक वो समझती उसका हैण्ड बैग गायब था वो चोर शायद इसलिए जान बुझकर टकराया था । " हेल्प -हेल्प  प्लीज हेल्प मी  " वो चिल्लाइ मगर चोर गायब हो चुका था । लोग इकट्ठे हो गये थे मगर अब क्या हो सकता था । गुस्से के मारे लड़की का बुरा हाल था । किसी ने कहा आप थाने मे रिपोर्ट दर्ज कर दीजिए  शायद आपकी कोई मदद हो जाये लड़की ने कुछ सोचा और टैक्सी मै बैठकर थाने की तरफ चल दी ।  

 क्या इंडिया मे अब भी वही सब होता है । मै बारह साल बाद इंडिया आई और आते ही मेरा हैण्ड बैग बीच रास्ते मे ही लुट लिया । आप मेरी रिपोर्ट लिखे मुझे मेरा सामान तुरन्त मिलना चाहिए " जामिया नगर थाने मे सब इंस्पेक्टर पर बुरी तरह बिखर रही थी रवि बार-बार मैडम  कह  रहा था मगर वो सुन ही नही रही थी कि जैसे हैण्ड बैग चोर ने नही पुलिस ने चुराया हो । बड़ी  मुश्किल से वो शान्त हुई जब बोलते -बोलते थक गई ,रवि ने पानी का गिलास थमाया तो उसने इस तरह गिलास पकड़ा  जैसे कोई एहसान कर रही हो । मैडम हम आपकी रिपोर्ट लिख रहे है और कोशिश होगी कि लुटेरा जल्दी से जल्दी पकड़ा  जाये ,रवि ने कहा तो वो कुछ नही बोली । राजन थाने पहुंचा तो कुछ गहमा गहमी का माहौल था  शायद कोई लड़की तेज-तेज आवाज मे कुछ कह रही थी ,वो  जीप खड़ी करके अंदर आफिस की तरफ बढ़ने लगा । ठीक है आप जल्दी से जल्दी लुटेरे को पकड़िए और मुझे जरूर बताइयेगा । राजन को कुछ आवाज जानी पहचानी सी लगी , उसने पलटकर पहली बार लड़की की तरफ देखा  धड़ाम धड़ाम |राजन को ऐसा लगा जैसे उसके सिर पर आसमान टूट पड़ा हो , वह हैरत से उस लड़की को देखे जा रहा था जो पता नही क्या-क्या कह रही थी। दिमाग सुन्न हो चुका था , जुबान को जैसे लकवा मार गया ,वह लड़की जा चुकी थी, मगर राजन बुत बना हुआ खड़ा था , दिमाग सायँ सायँ कर रहा था,सर क्या हुआ सर?रवि ने पास आकर कहा मगर वो वैसे ही बुत बना खड़ा  रहा। 

काफी देर बाद राजन को जैसे होश आया मगर हैरत उसके चेहरे पर अब भी मौजूद था , रवि यह लड़की कौन थी,राजन व्यग्रता से पूछा,सर यह रूचि थी , लन्दन से आई है बारह साल बाद और आते ही लुटेरे ने हैन्डबैग छीन लिया" रवि कहता रहा मगर राजन का ध्यान कहीं और था , वह सकते की हालत में था,वही है यह बिल्कुल वही ,राजन ने खोये -खोये लहजे में कहा,  कौन सर ...कौन सी लड़की ?रवि ने हैरत से पूछाँ ,वही लड़की  जिसका खून होते मैने सपने में देखा था,राजन ने जैसे धमाका किया। क्या....य..ह.. कैसे हो सकता है?रवि हैरान होकर बस इतना ही कह सका ,मै सच कह रहा हूँ रवि यह वही लडकी है,  सर कहीं आपको वहम तो नही हुआ.., नही रवि यह वही लड़की है और तुमने देखा नही उसके हाथ में वही ब्रैसलेट जिसपर अग्रेंजी में R लिखा था, रवि को यकीन करना पड़ा  कि शायद सर सही कह रहे है वरना इतने इत्तिफाक नही हो सकते ,  सर अगर यह वही लड़की है तो लगता है आपको पूर्वाभास हुआ है तभी आपको लगातार वही सपना बार-बार आ रहा है,रवि ने कहा तभी राजन का फोन बज उठा , दूसरी तरफ वीणा थी " हैलो राजन ,मैं गुडगाँव के लिये निकल रही हूँ ,ठीक है मगर जल्दी आना,मै कोशिश करूगीं और अपना ख्याल रखना,इतना कहकर फोन डिस्कनैक्ट हो गया , फोन मेज पर रखते हुए राजन ने कहा " रवि तुम क्या कहते हो इस बारे में क्या इसी लड़की का कत्ल होने वाला है? सर यकीन तो होता नही मगर आपका सपना सच हुआ तो यकीनन इसी लड़की का कत्ल होगा ,कमाल है रवि हमारे सामने यह अजीबो गरीब केस है जिसकी हम रिपोर्ट भी नही लिख सकते और हमें पहले से ही मालूम है कि कत्ल किसका होना है" राजन ने कहा तो रवि ने भी गर्दन हिला दी।  सर एक बात बताईये कि अगर सपना झूठा हुआ तो ? देखो रवि हम ये मानकर चलते है कि सपना सच है तभी हम ठीक से सोच पायेगें नही तो पता नही हम सोचते रहे और कातिल कामयाब हो जाए " राजन बोला" ठीक है सर आप सही कह रहे है" , मगर रवि कत्ल कब होगा ये हमे नही मालूम ,आज भी हो सकता ,कल भी हो सकता है , महीना भी लग सकता है फिर पता कैसे चलेगा कि कत्ल कब होगा तभी हम कुछ कर सकेगें वरना नही, राजन ने निराशा के साथ कहा तो रवि ने कुछ सोचते हुए कहा,सर आप अपने सपने को जरा गौर से समझने की कोशिश करे जरूर उसमे कुछ ऐसे संकेत होगें जो हमारी मदद कर सके तभी तो आपको यह सपना दिखाई दिया है,कहकर रवि चुप हो गया।  राजन वाकई सिगरेट सुलगाकर सपने पर गौर करने लगा, काफी देर बाद राजन ने आंखें खोली , कुर्सी पर सीधा बैठते हुए रवि से कहा " रवि आमतौर पर कोई आदमी बेड पर कैसे सोता है,सर सीधी सी बात है सीधी अवस्था में या करवट लेकर मगर कभी कभी उल्टी अवस्था में भी ,रवि ने कहा तो राजन बोला ,मगर रूचि बेड पर आड़ी तिरछी अवस्था में थी और सिर पायते की तरफ ना होकर बेड पर बीचो बीच थे और हाथ बेतरतीब लटके हुए लग ही नही रहा था कि जैसे वो नाॅर्मल तरीके से सो रही हो ऐसा लग रहा था जैसे उसे होश ही नही हो,रवि ने प्रभावित होकर कहा ,आप सही कह रहे है और सर एक बात और है कि रूचि बेड पर सोते वक्त जीन्स टाॅप पहने हुई थी जबकि लोग गाऊन का इस्तेमाल करते है" हो सकता है वो होश में न हो या फिर ज्यादा थक गई हो , बिल्कुल रवि ऐसा हो सकता है मगर वो कत्ल वाले दिन ऐसा कौन सा काम करेगी जिसकी वजह से वो थक सकती है और ऐसी अवस्था में सोयेगी। मगर सर एक बात अब भी अहम है कि उसका कत्ल क्यों होगा जबकि वो लंदन से भारत बारह साल बाद आई है इतने मे उसके कहा से दुश्मन पैदा हो गये ,रवि ने बिलकुल सही कहा था सो राजन बोला ,यह तो बाद मे पता चलेगा आखिर उसका कत्ल क्यों और किस उद्देश्य से होगा ? फिलहाल हमे यह सोचना होगा आखिर कत्ल कब होगा ,यह तो तय है  कि कत्ल जब भी होगा रात को होगा क्योंकि नाइट बल्ब का जलना साफ बताता है कि रात का वक्त था । आफिस मे सन्नाटा छा गया , सबसे अहम सवाल था कि कत्ल कौन से दिन होगा । दिमाग सुन्न हो गया , राजन ज़हन पर जोर देकर सोच रहा था कि कुछ तो ऐसी बात होगी , जो बताती हो कि कत्ल कौन से दिन होगा । अचानक दिमाग मे धमाका हुआ , राजन ने पटाक से  आंखें खोल दी । उसकी आंखों मे चमक थी ,चेहरे पर रौनक सी आ गई उसने रवि की तरफ देखकर कहा " देखो रवि मैंने सपने मे देखा था कि जो नकाबपोश अन्दर आया था उसका सारा शरीर पानी से भीगा हुआ था और पानी फ़र्श  पर टपक रहा था , इसका मतलब उस रात बारिश हो रही थी मतलब जब भी बारिश होगी समझो उसी रात कत्ल होगा । " मगर सर अब हमे कैसे मालूम होगा कि बारिश कब होगी और मान लिजिए उस रात बारिश होगी मगर हो सकता है हम कहीं और हों । बादल तो आधे घण्टे मे भी बन जाते है और अचानक बारिश हो सकती है " रवि ने बिलकुल सही कहा था । ऐसे मे वो कहीं भी हो सकते थे , क्या पता बादल कब बन जाये और जितनी देर मे पहुंचे कत्ल हो जाये ।  " रवि " राजन ने कहा  बात तो सही है , सवाल फिर वहीँ है बारिश किस वक्त होगी ? सर हम रुचि को सपने के बारे मे बता दें तो हो सकता है वही अपने बचाव का रास्ता ढूंढ  ले । सतर्क हो जाये , रवि ने अपनी तरफ से सही कहा था मगर राजन के चेहरे पर असंतुष्टता के भाव थे तभी उसने कहा ,रवि हमारी बात पर कोई यकीन नही करेगा । इसलिए हमारा रुचि को सपने के बारे मे बताना ठीक नही होगा , बल्कि उल्टा हमारा मजाक बनेगा अभी तो हम भी ठीक से यकीन नही कर पा रहे हैं , ऊपर से वो हमे नही जानती तो वो हमारी बात पर विश्वास नही करेगी , इसी विचार विमर्श पर कब छ: बज गए पता ही नही चला । दिमाग भी दोनो का थक चुका था अत: राजन ने घर जाने का फैसला किया और जीप घर की तरफ मोड़ दी । रात 9 बजे का वक्त था, राजन खाना खाने के बाद कॉफी पीने की इच्छा महसूस कर रहा था,उसके दिमाग मे अब भी सपने की बात चल रही थी, उसे अजीब सा लग रहा था, वह अब रोमांचित हो रहा था । वह ऐसे केस पर काम कर रहा था जिसमे कत्ल होने वाला था, उसका दिमाग बुरी तरह उलझा हुआ  था कि आखिर उसे ही क्यो ये आभास हुआ था कि एक अन्जान लड़की का कत्ल होने वाला था , वह सोच रहा था कि जनवरी के महीने मे बारिश नाम मात्र की होती है , और आजकल मौसम भी बिल्कुल साफ है । ऐसे मे बारिश कब होगी , उसका दिमाग ठस्स हो चुका था , यही सब सोचते हुए उसने टी0 वी0 आन कर के समाचार पर लगा दिया और कॉफी बनाने के लिए किचन मे चला गया। उसने अपने लिए कॉफी बनाई और मग मे डालकर वापस टी वी रुम मे आया तो उसके हाथ से कॉफी गिरते गिरते बची, हैरान सा वह खड़ा रह गया ,नज़रें टी0 वी0 पर चिपक कर रह गई । कारण था वह रिपोर्टर जिसने यह खबर सुनाई थी कि मौसम विभाग के अनुमान अनुसार कल शाम को तेज बारिश हो सकती है, राजन ने खबर सुनी तो शरीर मे सिहरन सी दौड़ गई ,उसने तुरंत रवि का नम्बर डायल किया ।  "हैलो " रवि की आवाज उभरी ,रवि तुमने टी.वी पर खबर सुनी ? नही सर कौन सी खबर ?  रवि ने महसूस किया की राजन सर उत्तेजित से है, "रवि रिपोर्टर के मुताबिक मौसम विभाग ने कल रात की भारी बारिश के आसार बताये हैं  " राजन ने एक ही सांस मे सारी बात बताई । " क्या सर " रवि भी हैरानी  मे पड़ गया उसे लगने लगा था कि सपना वाकई मे सच्चा था ।  रवि एक काम करो ,क्या सर बताइये ?  तुम कल से रुचि की निगरानी करो और देखो वो कहाँ जाती है और क्या करती है ? हो सकता है कातिल उसका पिछा कर रहा हो ,राजन ने रवि को निर्देश दिए । जी सर मे उसकी निगरानी करता हूँ । रिपोर्ट मे उसने अपना पता करोलबाग मे कोई कोठी ह उसकी वहां की दी है। मैं सुबह पहुंच जाऊंगा । और रवि मुझे रिपोर्ट देते रहना , "जी सर " इतना कहकर राजन ने फोन काट दिया । वह अजीब सा रोमांच महसूस कर रहा था  धड़कन बढ़ गयी थी ,नींद आँखों  से ओझल हो चुकी थी, पता नही कितनी देर वह सोच मे डुबा रहा।सुबह राजन उठा तो 9 : 30 बज चुके थे, रात को देर से सोया था, वही सपना फिर दिखाई दिया था उसे, अब वो परेशान नही हुआ सपने की वजह से ,तैयार  होकर वह थाने पहुँचा ।अपने केबिन मे आया ही था कि रवि का फोन आ गया ,उसने बताया कि रुचि अभी कोठी से बाहर नही निकली है, कोई विशेष बात नही थी।मौसम साफ था, धुप निकली हुई थी ऐसा लग ही नही रहा था कि आज बारिश भी हो सकती है , पता नही बारिश होगी भी या नही । राजन यही सोच रहा था ,फिर वो फाइल मे मगन हो गया ।12 : 30 बजे रवि का फोन आया, राजन ने कॉल रिसीव की "हैलो" दूसरी तरफ रवि ने कहा  सर रूचि अभी-अभी बाहर निकली है और अपनी गाड़ी में बैठ कर तिलक रोड पर गई है। मै आॅटो से पीछा कर रहा हूँ  ,ठीक है रवि देखते रहना कोई उसका पीछा तो नही कर रहा है, राजन ने कहा। जी सर ,और हाँ सर रूचि ने काली जिन्स और लाल टाॅप पहन रखा है जैसा कि आपने सपने में देखा था,बहुत बढ़िया रवि शायद सपना सच्चा है ,अब लग रहा है कि हम सही रास्ते पर है ,फोन डिस्कनेक्ट करते हुए उसने देखा कि आसमान पर काले बादल उमड़ आये थे। राजन रोमाचिंत हो गया, रवि के मुताबिक रूचि पहले तिलक रोड पर किसी रेस्टोरेन्ट में गई थी ,वहाँ से वह तीन बजे निकली थी और फिर किसी बार में गई थी। राजन शाम आठ बजे घर पहुचाँ ही था जब रवि का फोन आया ,हाँ रवि क्या खबर है ,सर रूचि बार से निकल चुकी है और सर, उसके कदम भी लड़खड़ा रहे हैं, शायद ज्यादा पी रखी है , रवि ने कहा। यही कारण था रवि जिसकी वजह से वो बैड पर आडी तिरछी सोई थी, जी सर वैसे मुझे कोई सन्दिग्ध आदमी उसके आस पास नही दिखा है ,वो अपनी कोठी के पास पहुचॅ गई है , गुड तुम वहीं कही छिप जाओ। सर आगे क्या करना है ? रवि ने पूछा। 

रात साढ़े दस का टाईम था, जोरदार बारिश हो रही थी , तेज हवाएँ चल रही थी , हर जगह पानी ही पानी था। कोठी के बाहर खड़ा वह नकाबपोश भी पूरी तरह भीगा हुआ था,ऊपर से नीचे तक अपने शरीर छिपाये वह धीरे धीरे उस पेड़ पर चढ़ने लगा जिसकी एक डाली चार दीवारी के अन्दर कोठी की तरफ थी, वह बड़े आराम से पेड़ पर चढ़ा और दोनो हांथों से डाल को पकडकर कोठी के अन्दर कूद गया , तेज बारिश का शोर था सो उसके कूदने से हुई हलचल दब गई। वह धीरे -धीरे कोठी के पीछे पहुचाँ और रेन वाटर पाईप पर धीरे -धीरे ऊपर चढ़ने लगा , वह उस रूम के छज्जे पर खड़ा था जिसमे से हल्का उजाला झांक रहा था ,जहाँ पर वह खड़ा था वह खिड़की थी ,उसने जेब से शीशा काटने का हीरा निकाला और गोलाई में शीशे पर चलाने लगा। कटे हुए शीशे पर उसने  कुछ रबड़ जैसी कोई चीज लगाइ और जब उसे वापिस खिंचा तो उसके साथ मे शीशे का कटा हुआ गोल हिस्सा भी चिपक कर आ गया, अब खिड़की के शीशे मे गोल छेद हो गया ,जिसके अन्दर हांथ डालकर उसने खिड़की की चिटकनी खोल दी । थोड़ी देर वह वैसे ही खड़ा रहा फिर खिड़की की दीवार पर चढ़कर अन्दर कूद गया । क्रेपसोल के जुतों के कारण कोई आवाज नही हुई फिर भी वो कुछ पल वैसे ही रहा। उसने देखा रुचि बैड पर आडी - तिरछी अवस्था मे पड़ी है। वह घुमकर उसके चेहरे की तरफ आया एक हांथ कोट के अन्दर था।अगले पल उसके हांथ मे रिवाल्वर था ,उसने एक हांथ से रुचि का कंधा पकड़कर  घुमा दिया । रुचि ने कुनमुना कर आंखें खोली और हैरत से जाम होकर रह गई , एक अन्जान व्यक्ति को देखकर वह डर के मारे कांप रही थी।बड़ी  मुश्किल से बोली " कौ -----कौन हो तुम ? मगर नकाबपोश कुछ नही बोला । उसके शरीर से पानी टपक रहा था । यहाँ कैसे आये तुम ------मुझे क्यों मारना चाहते हो ? मगर नकाबपोश कोई जवाब नही देना चाहता था ,उसने हाथ सीधा किया ,उगंलिया ट्रिगर पर कसने लगी, रुचि के चेहरे पर ख़ौफ़ ही ख़ौफ़ था । वह भय से काप रहीं थी, नकाबपोश ने ट्रिगर दबाया धांय -धांय गोली की आवाज से इलाका थर्रा गया। गोली नकाब पोश के हांथ मे लगी थी वह चीख कर अपने हांथ को पकड़े वही बैठ गया । नकाबपोश द्वारा चलाई गोली दीवार पर लगी , रुचि ने जब देखा कि नकाबपोश उसे मारना चाहता है तो उसने उसकी तरफ ही छलांग लगाई थी । वह वही फर्श पर पड़ी  थी। कुछ देर किसी की समझ नही आया तभी परदे के पीछे से इंसपेक्टर राजन बाहर निकला उसने नकाबपोश को दबोच लिया । बाहर दरवाजे पर दस्तक हुई ,दरवाजा जोर-जोर से खटखटाया जा रहा था । मैडम आप दरवाजा खोलिये,राजन ने रुचि से कहा तो रुचि ने अपने आप को संभालते हुए दरवाजा खोल दिया ,राजन ने नकाबपोश को रिवाल्वर से कवर कर रखा था ,सब--इंस्पेक्टर  रवि अन्दर आया,एक पल मे ही वो मामला समझ गया, रवि पहले इसका नकाब उल्टा करो देखे आखिर यह कौन है ?  रवि ने नकाब पोश का हैट और नकाब उलट दिया ।  तुम ,तुम यह वाक्य राजन और रुचि के मुंह से एक साथ निकला,हैरत के मारे किसी के मुंह से बोल नही निकले, राजन फटी-फटी आंखो से उसका चेहरा देख रहा था,जो कोई और नही वीणा थी,उसकी गर्लफ्रेंड वीणा । रुचि भी कम हैरान नही थी कि आखिर कातिल यह निकलेगी,बहुत देर बाद राजन ने कहा,वीणा तुम हो कातिल,मगर वीणा के मुंह से एक शब्द नही निकला । तुम रुचि का कत्ल क्यो करना चाहती हो , राजन ने कठोर लहजे मे कहा,मेरी कजिन है  वीणा ने काँपते हुए  कहा,कजिन है मगर तुमने कभी बताया नही , राजन ने पुछा । तो वीणा उन्हे बताती चली गयी .

राजन रूचि 12 सालों से लंदन मे थी इसलिए शायद मैने तुम्हे नही बताया,रूचि के माँ  बाप एक एक्सीडेंट मे मर चुके हैं,यह करोड़पति है , मेरी इच्छा थी कि मै भी अमीरों वाले शौक पुरे करती,महंगी गाड़ियों मे घुमती । तुमसे शादी करके ऐश भरी जिन्दगी गुजारती ,क्योंकि रूचि के मरने के बाद उसकी दौलत की वारिस मै होती  वीणा कहती गई , मगर तुम्हे कैसे मालूम कि यह कल ही इण्डिया आने वाली है  राजन ने पुछा,कभी-कभी  मेरी रुचि से बात हो जाती थी,इसी ने मुझे बताया था,कि यह कल आने वाली है तो मैने गुड़गांव शादी मे जाने का ड्रामा किया और वहां एक रात होटल मे बिताकर आज सुबह ही दिल्ली आ गई । वीणा,रुचि के कत्ल से तुम्हे इसकी दोलत कैसे मिलती ? राजन ने फिर उससे पुछा । अगर यह मर जाती तो मै ही इसकी वारिस होती मतलब मेरे माँ  बाप , तो इस तरीके से मै अमीर हो जाती ,विणा सर झुकाकर बोली । मगर अब तुम जेल जाओगी मुझे अफसोस है मैने तुम जैसी लड़की से प्यार किया, राजन अफसोस से बोला । पहली बार रुचि इस बीच बोली,उसने राजन से कहा कि आपको कैसे पता चला कि यह मुझे मारने वाली है ? राजन ने उसे सपने से लेकर उसके निकलने के बाद तक सब कुछ बताया । रुचि हैरत से सब कुछ सुन रही थी,उसने सोचा भी नही था  कि  आज उसकी जान एक सपने की वजह से बची है । यही सब सवाल वीणा के दिमाग मे भी थे तो वह भी हैरत से राजन का मुँह ताकने लगी ,और मैडम जब आप बार से निकली तो मैने यह खबर सर को दी ,रवि ने भी आगे का वाक्या बताया , तभी सर ने कहा कि तुम चाभी का इन्तजाम करो, मैंने मास्टर की सर को दी जिससे यह रुचि के बेडरूम के परदे की ओट मे छिप गये और मै बाहर छिप कर बैठा था कि कोई ऐसी -वेसी घटना हो तो सम्भालूं ,इतना कहकर रवि चुप हो गया । वीणा को जेल भेज दिया गया था,कोई सबूत की बात नही थी वह रंगे हांथो पकड़ी गई थी । रुचि ने राजन और रवि का शुक्रिया अदा किया । आखिर उन्ही की वजह से वो जिन्दा है,राजन को वीणा से ऐसी उम्मीद नही थी । वह सोच रहा था कि ऊपर वाले ने उसे सही वक्त पर पूर्वाभास करा दिया। 

 

कहानी क़त्ल पूर्वाभास

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