आधुनिक भारत का रहस्य
आधुनिक भारत का रहस्य
रतलाम कि ओर बढ़ते हुए, आदर्श दिल्ली से रोशनी के साथ यात्रा के दौरान, खिड़की से हरे-भरे फसल के खेतों और पेड़ों को देख आनंदित था।
रेलगाड़ी में अत्यधिक भीड़ थी और इसी कारण कई बार घुटन से जूझते हुये, आदर्श सोच रहा था कि कितना अच्छा होता गर उसे भी खिड़की वाली सीट प्राप्त हो जाती।
रोशनी को भी कई बार निराशा होती थी जब खिड़की से हवा के झोंके कुछ समय के लिये बंद हो जाते थे।
आदर्श, पेड़, घरों और खेतों को दौड़ते देखना अच्छा लगता हैं, हैं ना, रोशनी ने पूछा।
आदर्श ने तुरंत हाँ में उत्तर दिया और अगले क्षण रेलगाड़ी के भीतर देखा और चुपचाप, उदास होकर बैठा रहा।
आपकी ओर से ऐसे अद्भुत दृश्य हैं लेकिन मेरी ओर से क्यों नहीं, आदर्श ने प्रश्न पुछा ।
उनकी बातें सुनकर, सामने बैठें ज्येष्ठ चाचाजी, दोनों को देख मुसकुरायें। क्या मैं आपके प्रश्न का उत्तर दूं? आदर्श और रोशनी ने कुछ देर सोचा और हाँ में सिर हिला दिया।
चाचाजी ने समझाया, यह दो चरम सीमाओं के बीच की खाई है - हरे, हवादार व सुंदर दृश्य और दूसरी ओर अत्यधिक भीड़, नमी और अप्रिय .....
रोशनी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, नहीं, कोई अप्रियता तो नहीं, लेकिन खिड़की से बाहर देखना जितना अच्छा लगता हैं, उतना भीतर नहीं लगता ।
इस स्थिति का अत्यधिक जनसंख्या के साथ बहुत गहरा संबंध है, और हम सभी को इस बारे में सोचना, कार्य करना और विश्लेषण करना अति आवश्यक हैं। दूसरी ओर अल्प उत्पादन - ढीले ग्राम शिक्षा के कारण, हमारी मौलिकताओं द्वारा प्रगति के उद्देश्यों को प्राप्त करने में अवरोध निर्माण कर रहे हैं।
चाचाजी..... हम्म! अत्यधिक जनसंख्या या अल्प उत्पादन - दोनों में से वास्तविक कारण क्या है?
प्रारंभिक आधुनिक भारत में, एक बड़ी जनसंख्या को व्यापक रूप से समृद्धि और प्रगति का संकेत माना जाता था। घनी जनसंख्या वाले क्षेत्र, उपजाऊ भूमि, श्रमिको की उपलब्धता, सुशासन और शांतिपूर्ण स्थिति के संकेत दर्शाते थे। छोटी जनसंख्या को गिरावट के संकेत के रूप में देखा जाता था। अकाल-सूखा, युद्ध, रोग व भुखमरी चौंकाने वाली नियमितता के साथ होती थी और चूंकि भारत का, तब और आज का प्राथमिक उद्योग - कृषि था और हैं, मानसून की बारिश पर अत्याधिक निर्भरता थीं । जिस कारण श्रमिक मुद्दों की ढेरों समस्याएं रहीं।
शिक्षा की महत्ता थी, लेकिन इसके बहुत ही सीमित पहुंच के कारण, अधिकांश लोग वरिष्ठो के परामर्श का सम्मान कर, बीना प्रश्न पुछे पालन किया करते थें।
फसल की पैदावार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, श्रमिकों की समस्याओं के कारण होने वाले नुकसान से बचने के लिए, अकाल का सामना करने के लिए, तब जनसंख्या की मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता प्रकट हुई होगी ।
रोशनी गहरे सोच में डूब गई और कुछ क्षणों पश्चात पूछ बैठी, "चाचाजी, इसके बदले क्या किया जा सकता था?"
हो सकता है कि तब दूर दृष्टि की कमी रहीं हो, और संभव हैं कि यह तब की विवशता भी रहीं होगी ।
कुछ क्षणों के विमर्श के उपरांत, चाचाजी ने कहा, लेकिन अब हम सभी को पता होना चाहिए कि क्या किया जाना चाहिए ।
इस बीच, रेलगाड़ी धीमी हो चुकी थी और चाचाजी आदर्श और रोशनी को शुभकामनाएं दे कर अपने गंतव्य पर उतर गए।
अब, दोनों को मन में घृणित भावना कतई नहीं थी, अपितु उन्हें अपने ओर से योगदान के बारे में पता चला।
